Laghu Siddhant Kaumudi (लघुसिद्धान्तकौमुदि)

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Dr. Ramakant Pandey - Sanskrit & Hindi - Bharatiya Vidya Sansthan

Laghu Siddhant Kaumudi (लघुसिद्धान्तकौमुदि)

लघुसिद्धान्तकौमुदि (Laghu Siddhant Kaumudi) व्याकरण शास्त्र का परिचय अन्य शास्त्रों के उपकारक के रूप में प्राप्त होता है; इसीलिये समस्त वेदाङ्गों में इसको प्रधान अंग माना गया है। वह प्राधान्य अन्य शास्त्रोपकारकत्थ-रूप है। इसके विषय में कतिपय टीकाओं में चर्चा प्राप्त होती है, जो व्युत्पत्तिपरक अर्थ से भित्र है। व्युत्पत्ति तो अत्यन्त प्रसिद्ध है- व्याक्रियन्ते व्युत्पाद्यन्ते अनेन इति व्याकरणम् अर्थात् शब्दकर्मीभूत व्युत्पादन साधन को व्याकरण कहा जाता है। जबकि व्याकरण-परम्परा में साधु शब्दावधिक असाधु शब्दकर्मक नियमविशेष को व्याकरण कहते हैं। यह सामान्य लक्षण न केवल पाणिनीय व्याकरण के लिये, अपितु पाणिनि से पूर्व जिनका स्मरण सूत्रों में स्वयं भगवान् पाणिनि ने किया है, उन समस्त व्याकरणों में व्युत्पत्तिमूलक लक्षण संघटित होता है; किन्तु कोई आचार्य मात्र पाणिनीय व्याकरण के लिये ही लक्षण लिखते हुये कहते हैं कि पाणिन्यु- पज्ञं (व्याकरणम्) अर्थात् पाणिनि-कर्तृक आद्योच्चारणज्ञानविषयीभूर्त यत् तत् व्याकरणम्। इस प्रकार व्याकरण के स्वरूप के विषय में विभित्र आचार्यों ने विभिन्न मतों को उठाया है। यह व्याकरण तीन भागों में विभक्त होता है- प्रक्रिया, परिष्कार एवं दर्शन।

Author : Dr. Ramakant Pandey

Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan

Language : Sanskrit & Hindi

Edition : 2016

Pages : 672

Cover : Hard Cover

ISBN : 978-93-81189-46-7

Size : 14 x 4 x 21

Weight : 

Item Code : BVS 0097

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